सोमवार को सूरत में किरण हॉस्पिटल का उद्धाटन करने पहुंचे प्रधानमंत्री ने पाटीदारों के जरिए शुरू किए गए आरक्षण आंदोलन के बाद पहली बार पाटीदारों को संबोधित किया. प्रधानमंत्री ने समस्त पाटीदार ट्रस्ट के जरिए शुरू किए गए इस अस्पताल के दानवीर के लिए कहा कि पैसे बड़ी बात नहीं होती है लेकिन समाज के लिये सेवा का ऐसा काम करना बड़ी बात होती है.
पाटीदारों का नाम लिए बिना प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां पर मुझे अपने परिवार जैसा महसूस होता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि सूरत आने का तय हुआ तो लोग फोन कर कहने लगे कि आप सर्किट हाउस रुकने वाले हैं, आपके लिए खिचड़ी लेकर आएं, बाजरे की रोटी लेकर आएं. आज सुबह तो खास मोटीवाली रोटी यानि भाखरी नास्ते में लेकर आ गए. सूरत में कभी उन्हें नहीं लगता कि वो बतौर प्रधानमंत्री यहां पर आए हैं. जो प्यार और भावना लोगों की उनके साथ जुडी हुई है वो उन्हें हमेशा परिवार का ऐहसास कराती है.
गौरतलब है कि किरण अस्पताल खुद पाटीदारों के जरिए बनाया गया है. साथ ही जहां तक यहां मौजूद लोगों की बात है यहां 90 प्रतिशत लोग जनसभा में पाटीदार ही हैं. पाटीदार परिवार ज्यादातर किसान हैं. वैसे में प्रधानमंत्री ने इस बात का भी जिक्र किया कि कैसे किसान मां-बाप अपने बच्चों को खुद गरीबी में जी कर अपने बच्चों को अच्छा इंसान बनाते हैं. जो आज भी चाहें कितने भी पैसे वाले बन जाएं लेकिन अपने गांव से जुड़े हुए हैं.
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