योगी दरबार में तलाक पीड़िताओं की गुहार
1 - वॉट्सएप पर मिला तलाक
आज पलभर में दुनिया से जोड़ने वाली तकनीक इंसान की निजी जिंदगी में जबरदस्त दखल दे रही है। 1000 मील दूर से पहुंचा एक छोटा सा जीवनभर के रिश्ते को झटके में खत्म कर रहा है। ऐसा ही कुछ हुआ हैदराबाद की दो महिलाओं के साथ। विदेश में रह रहे इनके पतियों ने इन्हें वॉटसएप पर तलाक मिला, और नहीं मानने पर ससुराल वालों ने मारपीट की। इसके बाद दोनों महिलाओं ने सरकार ने न्याय की गुहार लगाई। आगे की स्लाइडों में जानें क्या तलाक के नियम और महिलाओं के अधिकार.
2- स्पीड पोस्ट से तलाक
कानपुर की महिला आलिया सिद्दीकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ को ट्वीट कर न्याय की गुहार लगाई है। आलिया ने लिखा है कि उसके पति बिजनौर में एक सरकार अफसर हैं। वह यहां सहायक श्रम आयुक्त के पद पर हैं, उन्होंने दो शादियां कर रखी हैं और अब उसे स्पीड पोस्ट से तलाक दे दिया है कृपया मदद करें।
कानपुर की महिला आलिया सिद्दीकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ को ट्वीट कर न्याय की गुहार लगाई है। आलिया ने लिखा है कि उसके पति बिजनौर में एक सरकार अफसर हैं। वह यहां सहायक श्रम आयुक्त के पद पर हैं, उन्होंने दो शादियां कर रखी हैं और अब उसे स्पीड पोस्ट से तलाक दे दिया है कृपया मदद करें।
3 - फोन पर तलाक
तीन तलाक ने बांदा की आशिया की जिंदगी को नरक बना दिया। एक ही झटके सबकुछ खत्म हो गया। तलाक पीड़िता आशिया ने योगी सरकार से इंसाफ की गुहार लगाई। आशिया ने बताया कि उसके पति से झगड़ा गया गया था और उसने सोचा कि दो चार दिन में सब ठीक हो जाएगा लेकिन उसे तो फोन पर ही तलाक दे दिया गया।
तीन तलाक ने बांदा की आशिया की जिंदगी को नरक बना दिया। एक ही झटके सबकुछ खत्म हो गया। तलाक पीड़िता आशिया ने योगी सरकार से इंसाफ की गुहार लगाई। आशिया ने बताया कि उसके पति से झगड़ा गया गया था और उसने सोचा कि दो चार दिन में सब ठीक हो जाएगा लेकिन उसे तो फोन पर ही तलाक दे दिया गया।
4 - चिट्ठी से तलाक
सहारनपुर के थाना नानौता की शगुफ्ता ने प्रधामनंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर गुहार लगाई कि उसका निकाह पांच साल पहले गंगोह के बुढ्ढाखेड़ा निवासी शमशाद के साथ हुआ था। उससे दो बेटियों पैदा हुई तो ससुराल वाले नाराज हो गए। शगुप्ता तीसरी बार गर्भवती हुई तो घर वालें ने गर्भपात कराना चाहा ताकि एक और बेटी न पैदा हो जाए लेकिन जब उसने मना कर दिया तो उसके साथ मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया गया और पति ने तलाक दे दिया।
सहारनपुर के थाना नानौता की शगुफ्ता ने प्रधामनंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर गुहार लगाई कि उसका निकाह पांच साल पहले गंगोह के बुढ्ढाखेड़ा निवासी शमशाद के साथ हुआ था। उससे दो बेटियों पैदा हुई तो ससुराल वाले नाराज हो गए। शगुप्ता तीसरी बार गर्भवती हुई तो घर वालें ने गर्भपात कराना चाहा ताकि एक और बेटी न पैदा हो जाए लेकिन जब उसने मना कर दिया तो उसके साथ मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया गया और पति ने तलाक दे दिया।
5 - थाने में दिया तलाक
तीन तलाक मामले को लेकर मुरादनगर की एक महिला ने थाने में तीन बार तलाक बोलकर अपने पति को तलाक दे दिया। इस पर पति ने शरियत का हवाला देते तलाक अस्विकार कर दिया और धर्मगुरुओं से सलाह लेने को कह दिया। पीड़िता का कहना है कि उसका पति नशे में रोज उसको बुरी तरह पीटता था। इसलिए वह उससे छुटकारा चाहती है।
6 - तीन बार तलाक बोलकर
मेरठ के कोतवाली क्षेत्र में एक महिला शराब के लती पति से तंग आकर तीन बार तलाक बोल दिया। हालांकि महिला ने कहा है कि उसके पति ने तलाक दे रखा और वह मायके में रह रही थी लेकिन उसे फंसाने के लिए उल्टा आरोप लगाए जा रहे हैं।
मेरठ के कोतवाली क्षेत्र में एक महिला शराब के लती पति से तंग आकर तीन बार तलाक बोल दिया। हालांकि महिला ने कहा है कि उसके पति ने तलाक दे रखा और वह मायके में रह रही थी लेकिन उसे फंसाने के लिए उल्टा आरोप लगाए जा रहे हैं।
ट्रिपल तलाक के क्या हैं नियम?
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अनुसार, मुस्लिम मजहब में वैवाहिक रिश्ते से छुटकारा पाने के लिए तीन स्टेप में तलाक होता है। जिसमें अगर मियां-बीवी में नहीं बन रही है तो पहले महीने में पहला तलाक, लेकिन इससे पहले आपस में बात करनी चाहिए। अगर इसके बाद भी समझौता नहीं हुआ तो दुसरे महीने में दूसरा तलाक दे सकते हैं, लेकिन पहले परिवार वालों को दोनों पक्षों को समझाना चाहिए। इसके बाद भी बात न बने तो तीसरा तलाक देकर सम्बन्ध खत्म कर सकते हैं।
ट्रिपल तलाक पर विवाद क्यों?
शरियत के जानकारों का मानना है कि जब पुरुष गुस्से में, नशे में या फिर बिना तलाक की नियत से भी एक साथ 3 बार तलाक बोल दे, तो उसे गुनाह माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद तलाक मान लिया जाता है। इन्हीं मुद्दों को लेकर तलाक पर विवाद हो रहा है। तलाक के खिलाफ खड़ी संस्थाएं और समाजसेवी इसे खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
शरियत के जानकारों का मानना है कि जब पुरुष गुस्से में, नशे में या फिर बिना तलाक की नियत से भी एक साथ 3 बार तलाक बोल दे, तो उसे गुनाह माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद तलाक मान लिया जाता है। इन्हीं मुद्दों को लेकर तलाक पर विवाद हो रहा है। तलाक के खिलाफ खड़ी संस्थाएं और समाजसेवी इसे खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
तलाक मामले पर महिलाओं के अधिकार-
पर्सनल लॉ बोर्ड की महिला मेंबर डॉ असमां जेहरा कहती है कि महिलाओं को तलाक मामले में 2 अधिकार दिए गए हैं। इसमें 'खुला' और 'फस्ख-ए-निकाह' है।
'खुला' में महिला अगर अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती है तो वह दारुल क़ज़ा (शहर काजी की कोर्ट) में अपील कर सकती है। इसमें उलेमा पति को बुलाता है और उसकी राय भी पूछता है। इसके बाद अपना फैसला सुनाता है।
जबकि 'फस्ख-ए-निकाह' में भी महिला पति के साथ नहीं रहना चाहती है तो फिर वह दारुल-क़ज़ा जा सकती है। वहां पर पति को बुलाया जाता है। अगर वह नहीं आता है तो उलेमा महिला के पक्ष में वन साइडेड फैसला सूना सकता है।
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